ब्राज़ील का विश्व कप अभियान अंतिम 16 में नॉर्वे से हार के साथ खत्म हो गया, और इस नतीजे ने तात्कालिक निराशा से आगे बढ़कर उस बड़े सवाल को सामने ला दिया है कि क्या कार्लो अंसेलोटी इस उम्रदराज़ टीम को फिर से गढ़ सकते हैं।
ब्राज़ील के साथ अंसेलोटी का कुल रिकॉर्ड बहुत खराब नहीं है: स्रोत के अनुसार, उन्होंने 16 मैचों में 10 जीत, तीन ड्रॉ और तीन हार दर्ज की हैं, और जब उन्होंने पद संभाला था तब टीम क्वालिफ़ाइंग में संघर्ष कर रही थी। लेकिन नॉर्वे के खिलाफ़ मैच ने मिडफ़ील्ड संतुलन, स्क्वाड की गहराई और सीधे आक्रमण बदलावों पर निर्भरता जैसी चिंताओं को उजागर कर दिया।
अब बहस का केंद्र चयन संबंधी फैसले हैं। कासेमिरो की वापसी से संगठन तो मिला, लेकिन खुली जगहों में टीम कमजोर दिखी, जबकि लुकास पैकेटा की चोट ने अंसेलोटी के मिडफ़ील्ड विकल्प और सीमित कर दिए। स्रोत ने नेमार को सेंटर-फ़ॉरवर्ड की भूमिका में रखने, उनके पेनल्टी गोल और मैच के बाद दिए गए उस संदेश पर भी ध्यान दिलाया है, जो राष्ट्रीय टीम के साथ उनके व्यक्तिगत अंत का संकेत देता है।
एडिटर्स और प्रशंसकों के लिए बड़ा मुद्दा यह है कि क्या ब्राज़ील को सिर्फ़ सामरिक बदलाव चाहिए या पूरी पीढ़ीगत पुनर्रचना। अंसेलोटी ने इस हार को एक नए चक्र की शुरुआत बताया, लेकिन स्रोत यह सवाल उठाता है कि क्या उनकी ताकतें—एक उच्च-स्तरीय सुधारक के रूप में—2030 विश्व कप से पहले लंबे पुनर्निर्माण के लिए उपयुक्त हैं।


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