डिडिएर डेशां ने इस विश्व कप में फ्रांस की शुरुआती सामरिक दिक्कतों पर अपनी शीर्ष श्रेणी की फॉरवर्ड लाइन के इर्द-गिर्द ढांचे में बदलाव करके जवाब दिया है, और सबसे स्पष्ट बदलाव उस्मान डेम्बेले को चौड़ा करना तथा माइकल ओलिसे को अधिक केंद्रीय भूमिका में लाना रहा है। इन बदलावों से फ्रांस बिना गेंद के अधिक सुरक्षित दिखा है और किलियन एमबापे को आगे की पंक्तियों में बेहतर सर्विस मिली है।
बीबीसी के विश्लेषण में बताया गया है कि सेनेगल के खिलाफ फ्रांस की शुरुआती व्यवस्था ने आगे की पंक्ति और मध्य क्षेत्र में एद्रिएन राबीओ और ऑरेलिएन चुआमेनी की जोड़ी के बीच समस्याएँ पैदा कीं। सेनेगल उन खाली जगहों का फायदा उठाने में सफल रहा, और इससे डेशां को अधिक फैले हुए रक्षात्मक रूप से हटकर एक सघन ढांचे की ओर जाना पड़ा, जिसने मैदान के केंद्र को बेहतर तरीके से सुरक्षित किया।
डेम्बेले और ओलिसे के बीच की भूमिका-परिवर्तन इस सुधार का केंद्रीय हिस्सा दिखता है। दाईं ओर डेम्बेले की ऊर्जा ने फ्रांस की रक्षात्मक संरचना को सहारा दिया, जबकि केंद्रीय क्षेत्रों से ओलिसे की पासिंग ने एमबापे की उस इच्छा के अनुकूल काम किया, जिसमें वह केवल अंतिम रेखा के स्ट्राइकर की तरह नहीं, बल्कि खेल में सक्रिय रूप से शामिल रहना चाहते हैं। जूल्स कोंडे की अधिक केंद्रीय स्थिति ने भी नियंत्रित कब्जे के दौरान कवर बेहतर करने और अलग तरह के आक्रमण विकल्प बनाने में मदद की है।
संपादकों के लिए बड़ा कोण सिर्फ यह नहीं है कि फ्रांस के पास स्टार खिलाड़ियों की भरमार है, बल्कि यह भी है कि डेशां लगातार यह बदलते रहे हैं कि यह स्टार-शक्ति साथ मिलकर कैसे काम करती है। स्रोत के मुताबिक, इन फेरबदल के बाद फ्रांस आक्रमण में अधिक खतरनाक और रक्षा में अधिक स्थिर दिखा है, हालांकि यह अभी भी एक ही स्रोत पर आधारित सामरिक पठन है, न कि आँकड़ों से पूरी तरह सत्यापित आकलन।


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