इंग्लैंड की पुरुष एम्प्यूटी फुटबॉल टीम नवंबर में मेक्सिको में होने वाले विश्व कप से चूक सकती है, अगर वह टूर्नामेंट खर्चों के लिए लगभग 50,000 पाउंड नहीं जुटा पाती। 2023 में नेशंस लीग जीतने के बावजूद यह टीम फिलहाल फुटबॉल एसोसिएशन की वित्तपोषित पैरा राष्ट्रीय-टीम संरचना का हिस्सा नहीं है।
यह कार्यक्रम 2006 में फंडिंग काट दिए जाने के बाद से एफए से अलग चल रहा है और अब चैरिटी दर्जा, स्वयंसेवकों तथा दान पर निर्भर है। स्कॉट रोजर्स, जिन्होंने पुरुष टीम को 2023 के नेशंस लीग खिताब तक पहुँचाया और अब भी कार्यक्रम से गहराई से जुड़े हैं, कहते हैं कि यह मौजूदा मॉडल उन खिलाड़ियों के लिए बनाए रखना मुश्किल है जो बिना वेतन के खेलते हैं और साथ ही काम तथा पारिवारिक जिम्मेदारियाँ भी निभाते हैं।
पूरे ढांचे में विकास के स्पष्ट संकेत हैं: महिला टीम ने 2024 में पहले विश्व कप के क्वार्टर फाइनल तक जगह बनाई, जबकि जूनियर मार्ग में 4 से 17 वर्ष के 70 से अधिक खिलाड़ी शामिल हैं। लेकिन वरिष्ठ पुरुष टीम के बारे में बताया गया कि वह अपने हालिया फंडरेजिंग लक्ष्य का आधे से भी कम हासिल कर पाई है, और खिलाड़ी आने वाले आयरलैंड मैच के लिए अपनी उड़ानों का खर्च भी खुद उठा रहे हैं।
एफए का कहना है कि वह प्राथमिकताओं और विकास को लेकर इंग्लैंड एम्प्यूटी फुटबॉल एसोसिएशन के साथ काम जारी रखे हुए है। अब संपादकीय सवाल यह है कि क्या इंग्लैंड की सफल विकलांगता फुटबॉल परियोजनाओं को बड़े टूर्नामेंट तक पहुँचने के लिए अब भी आपातकालीन चंदे पर निर्भर रहना चाहिए।


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