लुईस हैमिल्टन का मानना है कि इस साल सिल्वरस्टोन मौजूदा फॉर्मूला 1 कारों के कारण मूल रूप से बदला हुआ महसूस होगा, क्योंकि माना जा रहा है कि ट्रैक के कुछ सबसे तेज़ हिस्सों में इलेक्ट्रिकल डिप्लॉयमेंट कम पड़ सकता है। इसका असर खास तौर पर कोप्स, मैगॉट्स और बेकट्स जैसे हाई-स्पीड सेक्शनों में दिख सकता है।
चिंता का केंद्र यह है कि नए पावर यूनिट्स एक लैप में ऊर्जा कैसे बांटते हैं। लंबे, पूरी तरह तेज़ हिस्सों और रिकवरी के लिए अपेक्षाकृत कम ब्रेकिंग ज़ोन होने की वजह से ड्राइवरों को उन क्षणों में कम इलेक्ट्रिकल सहायता के साथ चलना पड़ सकता है, जो सामान्यतः सिल्वरस्टोन की पहचान माने जाते हैं।
हैमिल्टन ने संकेत दिया कि ट्रैक की प्रकृति ऑस्ट्रिया की तुलना में फेरारी और मर्सिडीज़ के बीच प्रदर्शन का अंतर और बड़ा दिखा सकती है। फर्नांडो अलोंसो ने भी डिप्लॉयमेंट घटने को लेकर इसी तरह की चिंता जताई, जबकि जॉर्ज रसेल का कहना था कि यही सीमा रेसिंग को अधिक दिलचस्प बना सकती है, भले ही ऑनबोर्ड फुटेज में यह कम प्रभावशाली लगे या कम बेहतर महसूस हो।
संपादकों के लिए एक प्रशासनिक पहलू भी ध्यान देने योग्य है। रिपोर्ट के अनुसार FIA ने सुरक्षा कारणों से कुछ हिस्सों में स्ट्रेट-लाइन मोड की अनुमति नहीं दी, और संभावित बदलाव को सभी टीमों का समर्थन नहीं मिला। इन प्रक्रियागत बिंदुओं की आगे पुष्टि होने तक सावधानी से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए।
तकनीकी बहस से अलग, ब्रिटिश ग्रां प्री वीकेंड में एक प्रचारात्मक ड्राइवर परेड भी है, जिसमें अलग-अलग लेगो कारों का इस्तेमाल होगा। हैमिल्टन ने इस विचार पर सवाल उठाया, हालांकि फेरारी ने कहा कि वे इसमें हिस्सा लेंगे, जबकि मैक्स वेरस्टैपेन ने इस अवधारणा की खुलकर आलोचना की।


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