हार्री केन की उन्नति किसी सीधी रेखा जैसी नहीं थी: गार्डियन की यह प्रोफ़ाइल दिखाती है कि शुरुआती अस्वीकृति, पोज़िशन को लेकर अनिश्चितता और धैर्य की बार-बार परीक्षा के बाद वे इंग्लैंड के सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। पूर्व कोच उनकी जुझारूपन और आत्म-विश्वास को वे गुण बताते हैं, जिन्होंने उन्हें Ridgeway Rovers से अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की सबसे ऊँची मंज़िल तक पहुँचाया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी राह कितनी अलग भी हो सकती थी। Ridgeway Rovers में अपने शुरुआती दिनों में, केन ने खुद गोलकीपर बनने की पेशकश की थी, और बाद में एक फ़िनिशर के रूप में विकसित होते हुए उन्होंने गोलकीपर कोच के साथ भी ट्रेनिंग की। फिर भी उनके गोल लगातार ध्यान खींचते रहे, पहले ही सीज़न में 40 से अधिक गोल सहित, और फिर Arsenal की नज़र उन पर पड़ी—बाद में क्लब ने उन्हें छोड़ भी दिया।
वह अस्वीकृति कहानी का अंत नहीं बनी। केन ने फिर से ग्रासरूट फुटबॉल में वापसी की, Tottenham Hotspur ने उन्हें अपने साथ जोड़ा, उन्हें फिर छोड़ा गया, और Watford में एक दौर के बाद Spurs ने उन्हें एक और मौका दिया। उनकी असली छलाँग धीरे-धीरे आई: 2013-14 में Tim Sherwood के तहत पहली टीम में जगह, और फिर अगले सीज़न में Mauricio Pochettino के साथ बड़ा उछाल, जब उन्होंने 51 मैचों में 31 गोल किए।
रिपोर्ट का व्यापक संदेश यह है कि केन की शांत और ज़मीन से जुड़े व्यक्ति वाली छवि के पीछे वह प्रतिस्पर्धी धार छिप सकती है जो शीर्ष स्तरीय फ़ॉरवर्ड्स के लिए ज़रूरी होती है। लेख में जिन कोचों का ज़िक्र है, वे उनकी मेहनत करने, खुद को ढालने और युवावस्था से लेकर Gareth Southgate के तहत इंग्लैंड ड्यूटी तक लगातार गोल की मांग बनाए रखने की क्षमता को रेखांकित करते हैं।
संपादकों के लिए यह प्रोफ़ाइल एक उपयोगी चर्चा-बिंदु देती है: केन की महानता को यहाँ किसी स्वाभाविक किशोर प्रतिभा की तरह नहीं, बल्कि निरंतरता, कोचिंग और अनुकूलन के अध्ययन की तरह दिखाया गया है। फिर भी किसी भी निर्णायक ऐतिहासिक तुलना में प्रकाशित करने से पहले रिकॉर्ड से जुड़ी कुछ बातों की आधिकारिक आँकड़ों से जाँच ज़रूरी रहेगी।


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