स्रोत के अनुसार NIH-समर्थित प्रधान अन्वेषक Neal K. Shah ने लोगों से कहा कि वे अपने गैर-प्रमुख हाथ से दांत ब्रश करने की कोशिश करें, ताकि दिमाग को थोड़ा अधिक काम करना पड़े। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि लेख साफ़ कहता है: यह आदत डिमेंशिया या Alzheimer’s disease को रोकने का सिद्ध तरीका नहीं है।
विचार यह है कि जो काम सामान्यतः अपने-आप हो जाता है, वही जब दूसरे हाथ से किया जाए तो वह कम स्वचालित रह जाता है और उसे पूरा करने के लिए अधिक ध्यान, समन्वय और योजना की ज़रूरत पड़ती है। स्रोत इस तरह की नई चुनौती को neuroplasticity और cognitive reserve जैसी अवधारणाओं से जोड़ता है, लेकिन यह नहीं बताता कि किसी peer-reviewed अध्ययन ने यह साबित किया हो कि इससे डिमेंशिया का जोखिम घटता है।
लेख यह भी बताता है कि CDC के एक आँकड़े के मुताबिक 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग हर 10 में से 1 वयस्क ने याददाश्त में बिगड़ने या संज्ञानात्मक गिरावट की शिकायत की। यही संदर्भ समझाता है कि दिमागी सेहत से जुड़े सरल रोज़मर्रा के उपाय, खासकर जब वे वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए सामने आते हैं, क्यों ध्यान खींचते हैं।
संपादकों और पाठकों के लिए सबसे सुरक्षित framing इसे चिकित्सा-आधारित रोकथाम के दावे की बजाय एक कम-जोखिम वाले मानसिक अभ्यास के रूप में देखना है। स्रोत कहता है कि दीर्घकालिक brain health के लिए विशेषज्ञ मानसिक उत्तेजना, नियमित शारीरिक गतिविधि, सामाजिक संपर्क और स्वस्थ जीवनशैली की आदतों के व्यापक मिश्रण की सलाह देते हैं।


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