2022 के बाद सेरेना विलियम्स का पहला सिंगल्स मैच विंबलडन में ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट के खिलाफ हार के साथ खत्म हुआ, लेकिन यह प्रदर्शन किसी साधारण विदाई जैसा नहीं लगा। BBC Sport के लिए नाओमी ब्रॉडी के कॉलम का तर्क था कि अगर विलियम्स शारीरिक रूप से आगे खेल पाती हैं, तो वह अब भी भविष्य के मैचों में खतरा बनी रह सकती हैं।
सबसे बड़ी चिंता उनका घुटना है। विलियम्स को विंबलडन में एक समस्या हुई, जिससे वे वीनस विलियम्स के साथ तय डबल्स उपस्थिति भी नहीं कर सकीं, और आगे के लिए न तो कोई पुष्टि की गई जांच है और न ही कोई पक्का कार्यक्रम।
ब्रॉडी की विश्लेषणात्मक नजर उन चीज़ों पर रही जो अब भी तेज दिखीं: सर्व, साफ़ गेंद-प्रहार और वह टाइमिंग, जिसने विलियम्स के करियर को परिभाषित किया है। उन्होंने उन क्षेत्रों की भी ओर इशारा किया जिन्हें मैच अभ्यास से सुधार की ज़रूरत पड़ सकती है, जैसे मूवमेंट, फुटवर्क और कोर्ट का इस्तेमाल करने का आत्मविश्वास।
अगर विलियम्स उत्तर अमेरिकी हार्ड-कोर्ट सत्र खेलती हैं, तो वही असली परीक्षा बन सकता है। वाशिंगटन, सिनसिनाटी और यूएस ओपन जैसे इवेंट्स में परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, इसलिए किसी भी वापसी की सफलता शॉट-मेकिंग के साथ-साथ रिकवरी और लगातार मैच खेलने पर भी निर्भर करेगी।
फिलहाल कहानी खत्म नहीं, बल्कि खुली हुई है। विलियम्स ने सार्वजनिक रूप से कोई पूरी योजना नहीं बताई है, लेकिन विंबलडन में उनके स्तर ने ब्रॉडी को यह मानने की वजह दी कि प्रतिद्वंद्वी उन्हें आसान ड्रॉ के रूप में नहीं देखेंगे।


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