स्पेन ने फ़ेरान टोरेस के 106वें मिनट में किए गए निर्णायक गोल की बदौलत अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार विश्व कप जीत लिया। रोड्री ने ट्रॉफी उठाई और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार भी अपने नाम किया, जिससे इस जीत में उनकी अहम भूमिका और साफ़ हो गई।
मैच के बाद का माहौल उच्चस्तरीय फुटबॉल रस्मों और निजी यादगार वस्तुओं का मिश्रण था: खिलाड़ियों के साथ प्रतिकृत ट्रॉफियाँ, स्मृति-चिह्न, रिंग, शर्ट, बूट, गेंदें और जाली के टुकड़े थे। पाउ कुबार्सी को युवा खिलाड़ी का पुरस्कार मिला, जबकि उनाई सिमोन ने गोल्डन ग्लव हासिल किया। यह अभियान जितना गेंद के साथ स्पेन की गुणवत्ता पर आधारित था, उतना ही गेंद के बिना उनके नियंत्रण पर भी।
स्रोत लेख इस फ़ाइनल को सामूहिक प्रभुत्व का प्रदर्शन बताता है, जिसमें टूर्नामेंट भर में स्पेन के कम अपेक्षित गोल-ख़िलाफ़ और ऑप्टा-आधारित एक टिप्पणी का ज़िक्र है कि अर्जेंटीना ने गोल पर बहुत कम ख़तरा बनाया। ये आँकड़े संदर्भ देने के लिए उपयोगी हैं, लेकिन संपादकों को चाहिए कि उन्हें स्वतंत्र रूप से आधिकारिक या डेटा-प्रदाता रिकॉर्ड से जाँच लें, तभी उन्हें अलग तथ्य की तरह इस्तेमाल करें।
लुइस दे ला फ़ुएंते की यात्रा भी इस कहानी का हिस्सा है: वरिष्ठ स्तर पर एक कठिन शुरुआती दौर से लेकर स्पेनिश फ़ेडरेशन सिस्टम में कई साल तक काम करने तक, अब उन्होंने ऐसे समूह को शीर्ष पर पहुँचाया है जिसमें वे खिलाड़ी भी शामिल हैं जिनके साथ उन्होंने युवा स्तर पर काम किया था। फ़ाइनल के बाद उनका संदेश समाप्ति का नहीं, बल्कि और भूख का था — और नज़रें पहले ही सितंबर के अगले मैच पर थीं।


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