स्पेन ने 2026 फीफा विश्व कप का खिताब जीतकर टूर्नामेंट खत्म किया, और ESPN की समीक्षा में उन्हें न्यायसंगत विजेता बताया गया है। यह अभियान 11 जून को एज़टेका में मेक्सिको की 2-0 से दक्षिण अफ्रीका पर जीत के साथ शुरू हुआ था। लेख का तर्क है कि फाइनल के नतीजे पर लगभग कोई बहस की गुंजाइश नहीं बची थी।
बड़ा निष्कर्ष सिर्फ स्पेन का खिताब नहीं है, बल्कि यह भावना भी है कि उनकी सफलता एक गहरी फुटबॉल संरचना का नतीजा है। स्रोत स्पेन की पुरुष, महिला और युवा फुटबॉल में हालिया उपलब्धियों को किसी एक बार की दौड़ नहीं, बल्कि मजबूत राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रमाण के रूप में देखता है।
अर्जेंटीना का सफर ज्यादा पीड़ादायक तरीके से पेश किया गया है। लियोनेल मेसी ने एक और बड़ा विश्व कप अध्याय दिया, लेकिन लेख के अनुसार फाइनल के बाद का टकराव और निराशा उसकी छाया बन गए, जबकि अर्जेंटीना की अनुभवी खिलाड़ियों पर आधारित टीम-चयन नीति की भी आलोचना की गई है। साथ ही, यह भी नोट किया गया कि उन्होंने 117वें मिनट तक गोल पर कोई शॉट नहीं लगाया था।
इंग्लैंड और फ्रांस को अलग-अलग तरह से आंका गया है। फ्रांस को अब भी किलियन एमबाप्पे, माइकल ओलिसे और उस्मान डेम्बेले जैसे खिलाड़ियों के साथ असाधारण व्यक्तिगत प्रतिभा वाली टीम बताया गया है, जबकि इंग्लैंड को थॉमस ट्यूशेल के तहत अपनी टीम-गुणवत्ता के अनुपात में कमजोर प्रदर्शन करने वाला बताया गया है।
विश्लेषण 104 मैचों में मैदान के भीतर हुई रेफरी-निर्णय प्रक्रिया की सशर्त सराहना भी करता है, लेकिन फोलारिन बालोगुन से जुड़े मैदान के बाहर के अनुशासनात्मक प्रबंधन पर चिंता जताता है। संपादकों को इस हिस्से को सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि यह एक राय-आधारित कॉलम की प्रक्रियागत आलोचना है, कोई स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं।


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