स्पेन ने फाइनल में अर्जेंटीना को हराकर 2026 फीफा विश्व कप जीता, और उसकी यात्रा किसी एक सुपरस्टार से नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रणाली से परिभाषित हुई। लुईस दे ला फुएंते की टीम ने आठ मैचों में सिर्फ एक गोल खाया, जिससे साफ हुआ कि उसका खिताब नियंत्रण, धैर्य और रक्षात्मक भरोसे पर टिका था।
स्रोत स्पेन को ऐसे टूर्नामेंट के बरअक्स रखता है जिसमें लियोनेल मेसी, किलियन एमबाप्पे, एर्लिंग हालांड, हैरी केन और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे बड़े नाम मौजूद थे। स्पेन के पास भी पेड्री, लामिन यामाल, रोड्री और पाउ कुबार्सी जैसे शीर्ष स्तर के खिलाड़ी थे, लेकिन टीम को किसी एक चेहरे के इर्द-गिर्द बनी हुई नहीं दिखाया गया।
दे ला फुएंते की पद्धति में गेंद पर नियंत्रण, बॉल गंवाने के बाद तुरंत दबाव बनाना और एक शांत, सुसंगत रणनीतिक पहचान शामिल थी। इस ढांचे ने ऐसे दल की मदद की जिसमें कई खिलाड़ी क्लब स्तर पर कठिन या चोट-प्रभावित सीज़न के बाद आए थे, जिनमें उनाई सिमोन, आयमेरिक लापोरते, पेद्रो पोरो, मार्क कुकुरेला, रोड्री, फाबियन रूइस, दानी ओलमो और मिकेल ओयारसाबाल शामिल थे।
स्रोत के अनुसार, स्पेन की मुहिम में सबसे बड़ा तनाव मौका भुनाने की क्षमता और एक स्वाभाविक पेनल्टी-बॉक्स स्ट्राइकर की कमी थी। लेकिन कुबार्सी की अगुवाई वाली सधी हुई रक्षापंक्ति और धैर्यपूर्ण मिडफील्ड आधार ने स्पेन को मुश्किल दौर पार कराने और सामूहिकता को टूर्नामेंट की निर्णायक ताकत में बदलने में मदद की।


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