इंग्लैंड का सामना विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में डीआर कांगो से होगा, क्योंकि मध्य अफ्रीकी टीम अपने समूह से सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान की टीमों में से एक बनकर आगे बढ़ी। यह इस टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में डीआर कांगो की पहली उपस्थिति है।
समूह चरण तक उनका सफर जुझारूपन पर टिका रहा: पुर्तगाल के साथ 1-1 की बराबरी, कोलंबिया से 1-0 की संकरी हार और उज्बेकिस्तान पर 3-1 की जीत। मुख्य कोच सेबेस्टिएन डेसाब्र के तहत डीआर कांगो को तोड़ना मुश्किल हुआ है, और बीबीसी स्रोत के अनुसार उनके कार्यकाल में 57 मैचों में 29 क्लीन शीट दर्ज हुई हैं।
उनकी रणनीति स्थिर नहीं, बल्कि लचीली रही है। डीआर कांगो ने टूर्नामेंट की शुरुआत में बैक-फाइव ढांचा अपनाया था, फिर उज्बेकिस्तान के खिलाफ 4-4-2 में बदलाव किया। आक्रामक खतरा तेज़ काउंटर और रक्षा के पीछे की दौड़ों से आने की उम्मीद है, खासकर योआने विस्सा और सेड्रिक बाकाम्बु के जरिए।
इस टीम के साथ एक व्यापक फुटबॉल कहानी भी जुड़ी है। डीआर कांगो की पिछली और अब तक की एकमात्र विश्व कप उपस्थिति 1974 में थी, जब वे ज़ैरे नाम से खेले थे और यूगोस्लाविया से 9-0 की हार सहित अपने सभी तीन समूह मैच हार गए थे। पांच दशकों से अधिक बाद, डेसाब्र की टीम अब इंग्लैंड के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले में एक बिल्कुल अलग कहानी लेकर उतर रही है।


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