फ़ॉर्मूला 1 में यह सक्रिय चर्चा चल रही है कि क्या भविष्य के इंजन फिर से V8 की दिशा में लौटें, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। FIA अध्यक्ष Mohammed Ben Sulayem एक छोटे हाइब्रिड तत्व वाले नैचुरली एस्पिरेटेड V8 का समर्थन कर रहे हैं, जबकि टीमें और निर्माता तकनीकी, व्यावसायिक और पर्यावरणीय पहलुओं के बीच संतुलन तलाश रहे हैं।
तत्काल दबाव इस साल के नए इंजन फॉर्मूले से जुड़ा है, जिसने खेल के भीतर ऊर्जा प्रबंधन की जरूरत और खासकर क्वालिफाइंग में ड्राइवरों के लैप-हमले पर उसके असर को लेकर चिंता बढ़ाई है। अगर बदलाव अगले सीज़न तक तैयार करने हैं, तो अल्पकालिक और मध्यमकालिक सुधार जल्दी तय करने होंगे, जबकि बड़ा नियम-रीसेट लगभग 2031 के आसपास अपेक्षित है।
V8 की वापसी के पक्ष में इसे जटिलता कम करने, लागत घटाने, आवाज़ बेहतर करने और कुछ हद तक वजन कम करने के उपाय के रूप में पेश किया जा रहा है। लेकिन तुलना सीधी नहीं है: पुराने V8 यूनिट आज की पावर-यूनिट्स से हल्के थे, फिर भी उस समय रेस की शुरुआत में कारों में कहीं अधिक ईंधन होता था, और आधुनिक सुरक्षा ढांचे सीधे कार-वज़न की तुलना को मुश्किल बना देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुरानी यादें फ़ॉर्मूला 1 की कारोबारी और तकनीकी ज़रूरतों से मेल खाती हैं। तेज़ आवाज़ वाले इंजन कुछ प्रशंसकों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन स्रोत के मुताबिक यह साबित करने के लिए कोई निर्णायक शोध नहीं है कि ऐसी पसंद कितनी व्यापक है; और कहीं अधिक शोर वाले कारें Miami, Las Vegas, Singapore या Monaco जैसे सिटी-सेंटर आयोजनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। Mercedes और Honda सहित निर्माता चर्चा के लिए खुले दिखते हैं, लेकिन दहन शक्ति, हाइब्रिड प्रासंगिकता और सतत ईंधन के बीच सही संतुलन अभी भी तय नहीं हुआ है।


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