रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड और मेक्सिको के बीच 1994 विश्व कप का ग्रुप मैच ऑरलैंडो के सिट्रस बाउल में 43°C की असाधारण गर्मी में खेला गया था, और यह मुकाबला खिलाड़ियों की भलाई पर चर्चा के लिए एक स्थायी संदर्भ बन गया। Jason McAteer और John Aldridge की यादें दिखाती हैं कि सीमित पानी की सुविधा और बदलावों से जुड़े नियमों ने हालात को और कठिन बना दिया था।
यह मैच आयरलैंड की इटली पर जीत के बाद हुआ और दोपहर में खेला गया, जब स्टेडियम के भीतर छाया लगभग नहीं के बराबर थी। स्रोत के अनुसार, गर्मी के तनाव के कारण 100 से अधिक दर्शक कथित तौर पर बेहोश हो गए थे, जबकि खिलाड़ियों को औपचारिक हाइड्रेशन ब्रेक के बजाय अस्थायी तरीकों पर निर्भर रहना पड़ा।
उस समय FIFA के नियमों में आधिकारिक पेय विराम शामिल नहीं थे, और मैदान पर बोतलबंद पानी पर पहले पाबंदी थी, जिसे बाद में बदलकर पानी पहुँचाने का एक अलग तरीका स्वीकार किया गया। सिर्फ दो बदलावों की अनुमति होने के कारण, दोनों टीमों के अधिकतर खिलाड़ियों को हालात के बावजूद पूरा मैच खेलना पड़ा।
लेख 1994 के उस अनुभव को मौजूदा विश्व कप में गर्मी से जुड़ी चिंताओं से भी जोड़ता है, खासकर संयुक्त राज्य के कुछ खुले स्टेडियमों में। McAteer का मानना है कि आज सुरक्षा उपाय पहले से बेहतर हैं, लेकिन यह तुलना आयोजकों के सामने एक अहम सवाल फिर से खड़ा करती है: जब गर्मी सेहत के लिए जोखिम बन जाए, तो मैचों की समय-सारिणी और स्टेडियम की परिस्थितियों में कितना बदलाव होना चाहिए?


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