जूनियर टेनिस में अभिभावकों का दबाव तब नुकसानदेह बन सकता है जब वयस्क बच्चे के नतीजों को विकास की प्रक्रिया के बजाय अपने निवेश, प्रतिष्ठा या भविष्य की कमाई का पैमाना मानने लगें। बीबीसी की रिपोर्ट में पूर्व जूनियर खिलाड़ियों, कोचों और प्रशासकीय प्रतिक्रियाओं को सामने रखा गया है, जो यह संकेत देती हैं कि यह केवल कुछ अलग-थलग मामलों की समस्या नहीं, बल्कि व्यापक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा भी है।
Ellie-Rose Griffiths, जिन्होंने बचपन में ही पूर्णकालिक प्रशिक्षण शुरू कर दिया था और बाद में 19 साल की उम्र में प्रतिस्पर्धी खेल छोड़ दिया, इस समस्या को अपेक्षाओं और थकान से जोड़ती हैं। रिपोर्ट में शामिल कोच बताते हैं कि कई अभिभावक रैंकिंग, रेटिंग और नतीजों पर अत्यधिक केंद्रित हो जाते हैं। Chris Johnson का कहना है कि क्लब स्तर पर कुछ घटनाएँ इतनी बढ़ चुकी हैं कि पुलिस को बुलाना पड़ा।
दबाव केवल भावनात्मक नहीं है। परिवारों को साल भर यात्रा, कोचिंग, टूर्नामेंट शुल्क और पढ़ाई को लेकर कठिन फैसलों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि LTA की खिलाड़ी-प्रगति व्यवस्था कम उम्र से ही संभावित प्रतिभा की पहचान करना शुरू कर देती है। यह संस्था कहती है कि उसने 2018 में अपनी रेटिंग और रैंकिंग प्रणाली की समीक्षा की थी, अंडर-11 स्तर से पहले राष्ट्रीय रैंकिंग की अनुमति नहीं देती, और माता-पिता के व्यवहार तथा कोचों के समर्थन पर केंद्रित Fair Play पहल शुरू करने की योजना बना रही है।
यह बहस सिर्फ इस पर नहीं है कि माता-पिता को बच्चों को आगे धकेलना चाहिए या पीछे हटना चाहिए। एम्मा रादुकानू और Kyle Edmund के उदाहरण दिखाते हैं कि सख्त अपेक्षाएँ समर्थन के साथ मौजूद रह सकती हैं, लेकिन सीमा तब पार होती दिखती है जब बच्चे की अपनी प्रेरणा की जगह वयस्क महत्वाकांक्षा ले लेती है।


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