पुर्तगाल और क्रोएशिया के बीच विश्व कप के राउंड ऑफ़ 32 का मुकाबला एक साफ़ कहानी लेकर आ रहा है: लुका मोड्रिच या क्रिस्टियानो रोनाल्डो में से किसी एक का यह सबसे नया विश्व कप अभियान यहीं खत्म हो सकता है। दोनों अनुभवी खिलाड़ी अपनी-अपनी टीमों के लिए अब भी अहम हैं, लेकिन उम्मीद यही है कि नतीजा सिर्फ़ यादों पर नहीं, बल्कि सामूहिक मिडफ़ील्ड लड़ाई पर टिका होगा।
वितीन्हा ने मोड्रिच और रोनाल्डो को विश्व फ़ुटबॉल के बड़े प्रतीक बताया, लेकिन यह भी साफ़ कर दिया कि पुर्तगाल चाहता है कि निराश होकर लौटने वाला नाम क्रोएशिया का कप्तान हो। दोनों पूर्व रियल मैड्रिड साथी एक विशाल उपलब्धि-तथ्य रखते हैं: 47 संयुक्त विश्व कप मैच, 2008 से 2018 के बीच छह बैलन डी’ओर, और मैड्रिड में साथ मिलकर चार चैंपियंस लीग खिताब।
इस टूर्नामेंट में उनका प्रभाव अब पहले जितना व्यापक नहीं रहा, बल्कि चुनिंदा रहा है। रोनाल्डो ने अब तक पुर्तगाल के सभी मिनट खेले हैं और दो गोल किए हैं, जबकि मोड्रिच ने 229 मिनट में पांच मौके बनाए और एक असिस्ट दी है। उपलब्ध आँकड़े यह भी संकेत देते हैं कि ड्यूल, रिकवरी और प्रगतिशील भागीदारी जैसी श्रेणियों में दोनों का शारीरिक असर घटा है।
इस वजह से सहायक खिलाड़ियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पुर्तगाल विटीन्हा, ब्रूनो फ़र्नांडेस, जाओ नेवेस, बर्नार्डो सिल्वा और रूबेन नेवेस जैसे तकनीकी रूप से मज़बूत मिडफ़ील्ड समूह पर भरोसा कर सकता है, जबकि क्रोएशिया ने मोड्रिच और मातेओ कोवासिच के अनुभव को पेटार सुचिच के उभरते प्रभाव के साथ जोड़ा है। रॉबर्टो मार्टिनेज और ज़्लात्को डालिच, दोनों ने इस मुकाबले में मिडफ़ील्ड अनुशासन और नियंत्रण को सबसे अहम बताया।
पुर्तगाल ग्रुप K में दूसरे स्थान पर रहकर यहाँ पहुँचा है, जबकि क्रोएशिया जानते हैं कि गेंद पर गलतियाँ एक तकनीकी रूप से सटीक प्रतिद्वंद्वी के सामने भारी पड़ सकती हैं। संपादकों और प्रशंसकों के लिए मूल सवाल यही है कि क्या यह मैच किसी एक दिग्गज के लिए विदाई कथा बनेगा या उनके आसपास उभरती नई पीढ़ी का मंच।


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