राफ़ेल नडाल 2008 के विंबलडन फ़ाइनल में रोजर फेडरर पर मिली अपनी जीत को अपने करियर का एक मोड़ मानते हैं। बारिश से बाधित और सेंटर कोर्ट पर ढलती रोशनी में खत्म हुए इस मैच में स्पेनिश खिलाड़ी ने 6-4, 6-4, 6-7 (5-7), 6-7 (8-10), 9-7 से जीत दर्ज की।
इस जीत का महत्व इसलिए और बढ़ गया क्योंकि नडाल की पहचान खास तौर पर क्ले, और विशेष रूप से रोलां गैरोस, पर बनी थी, लेकिन उनके सामने यह सवाल बना रहता था कि क्या वे दूसरे सतहों पर भी दबदबा बना सकते हैं। फेडरर, जो उस समय घास पर सबसे बड़ी ताकत और विंबलडन के पांच बार के डिफ़ेंडिंग चैंपियन थे, को हराकर नडाल ने पेरिस के बाहर एक बड़ा ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया।
नडाल ने बीबीसी को बताया कि इस नतीजे ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वे क्ले के अलावा भी बड़े खिताब जीत सकते हैं और इससे वे विश्व नंबर एक बने। मैच का रुख बार-बार बदला: नडाल ने दो सेट की बढ़त ली, फेडरर ने निर्णायक सेट तक मुकाबला खींचा, और आखिरकार देरी और कम होती रोशनी के बीच पांचवें सेट में स्कोर 9-7 तक पहुंचा।
2008 का यह फ़ाइनल टेनिस के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मैचों में से एक बना हुआ है। इसकी गुणवत्ता, प्रतिद्वंद्विता और विंबलडन इतिहास में इसकी जगह—सेंटर कोर्ट पर छत लगने से पहले पुरुष फ़ाइनल के रूप में आखिरी मैच—इसे और यादगार बनाती है। संपादकों और प्रशंसकों के लिए नडाल की यह टिप्पणी एक और परत जोड़ती है: यह सिर्फ एक क्लासिक जीत नहीं थी, बल्कि बड़े करियर-सफ़र में एक मानसिक मील का पत्थर भी थी।


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