इंग्लैंड एटलांटा में विश्व कप के अंतिम 32 में डीआर कांगो से भिड़ेगा, और थॉमस तुखेल का इंग्लैंड मैनेजर के रूप में पहला नॉकआउट मैच तुरंत चयन दबाव लेकर आया है। रीस जेम्स और जारेल क्वांसाह की चोटों ने इस मुकाबले से पहले राइट-बैक को सबसे स्पष्ट समस्या बना दिया है।
डीजे़ड स्पेंस इस चर्चा के केंद्र में दिखते हैं, क्योंकि ग्रुप स्टेज में उनका उपयोग किया गया था, जबकि ट्रेवो चैलोबा और एज़री कोंसा कम विकल्पों वाली रक्षात्मक सूची में संभावित विकल्प हैं। कोंसा का केंद्र-रक्षा में भी महत्व है और चैलोबा ने अभी तक टूर्नामेंट में खेला नहीं है, इसलिए फुल-बैक पर अंतिम फैसला इंग्लैंड के उस किनारे के संतुलन को तय कर सकता है।
रणनीतिक समस्या भी उतनी ही अहम है। स्रोत में उद्धृत FIFA डेटा के अनुसार डीआर कांगो बिना गेंद के अपने समय का आधे से अधिक हिस्सा लो-टू-मिड ब्लॉक में बिताते हैं, जिससे इंग्लैंड के विंग खिलाड़ियों और हैरी केन के लिए खाली जगह कम हो सकती है। इससे अंतिम चरण के अधिक सटीक फैसलों, सेट-पिसेज़ और केन की बॉक्स के भीतर मौजूदगी पर ज़्यादा जोर पड़ेगा, बजाय इसके कि सिर्फ उनकी गहरी लिंक-अप भूमिका पर निर्भर रहा जाए।
तुखेल को मिडफ़ील्ड और आगे की पंक्ति में भी फैसले लेने हैं। जूड बेलिंगहम ने पनामा के खिलाफ एक गोल और एक असिस्ट के साथ प्रभावित किया, लेकिन कैल्फ शिकायत के बाद डेक्लान राइस की संभावित वापसी उनकी भूमिका बदल सकती है। बुकायो साका और मार्कस रैशफोर्ड के वाइड पोज़िशन पर बने रहने की संभावना है, हालांकि साका के प्रबंधित मिनट और हालिया फिटनेस पृष्ठभूमि भी व्यापक तस्वीर का हिस्सा हैं।
जॉर्डन पिकफोर्ड पर भी नज़र रहेगी, क्योंकि टूर्नामेंट की उनकी शुरुआत मिश्रित रही है और उनके निर्णय तथा शॉट-स्टॉपिंग मेट्रिक्स को लेकर सवाल उठे हैं। इंग्लैंड के लिए तुरंत सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन शुरू करेगा, बल्कि यह भी है कि क्या तुखेल ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ, जो संख्या में बचाव करने की संभावना रखता है, नियंत्रण, चौड़ाई और बॉक्स-अंदर खतरे का सही मिश्रण निकाल सकते हैं।


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