चैंपियंस कप में ट्राई बोनस-पॉइंट देने का तरीका बदल रहा है: अब टीमों को अपने प्रतिद्वंद्वी से कम से कम तीन अधिक ट्राई करने होंगे, केवल चार ट्राई के एक तय मानक तक पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। अंतिम-16 तक पहुंचने का रास्ता भी बदला जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पूल से स्वतः क्वालिफाई करने वाली टीमों की संख्या कम होगी।
नए नॉकआउट क्वालिफिकेशन मॉडल के तहत, चारों पूलों की शीर्ष तीन टीमें सीधे आगे बढ़ेंगी। अंतिम-16 की बाकी चार जगहें तालिका अंकों के आधार पर तय होंगी, जबकि प्रमुख टाई-ब्रेकर के रूप में जीतों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह बोनस-पॉइंट बदलाव मैचों को अंतिम क्वार्टर तक अधिक प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए किया जा रहा है, खासकर तब जब एक टीम ने पहले ही मजबूत बढ़त बना ली हो। ट्राई-अंतर पर आधारित इसी तरह का तरीका पहले से फ्रांस की टॉप 14 और सुपर रग्बी जैसी प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल होता है।
अगले सत्र में टूर्नामेंट दिसंबर के बजाय अक्टूबर में शुरू होने वाला है। यह बदलाव चैंपियंस कप के मौजूदा 24-टीम ढांचे, यात्रा-सम्बंधी मांगों, पूल संरचना और दक्षिण अफ्रीकी क्लबों की भविष्य की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आ रहा है, हालांकि बड़े प्रारूपिक बदलावों के लिए हितधारकों की मंजूरी और 2030 तक लागू मौजूदा समझौतों को ध्यान में रखना होगा।


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